रविवार, 9 अगस्त 2015

SOCH SABSE BADA YOG

मैं मनुष्य को एक घने अंधकार में देख रहा हूं। जैसे अंधेरी रात में किसी घर का दीया बुझ जाये, ऐसा ही आज मनुष्य हो गया है। उसके भीतर कुछ बुझ गया है।
पर-जो बुझ गया है, उसे प्रज्वलित किया जा सकता है।
और, मैं मनुष्य को दिशाहीन हुआ देख रहा हूं। जैसे कोई नाव अनंत सागर में राह भूल जाती है, ऐसा ही आज मनुष्य हो गया है। वह भूल गया है कि उसे कहां जाना है और क्या होना है?
पर, जो विस्मृत हो गया है, उसकी स्मृति को उसमें पुन: जगाया जा सकता है।
इसलिए, अंधकार है, पर आलोक के प्रति निराश होने का कोई कारण नहीं है। वस्तुत: अंधकार जितना घना होता है, प्रभात उतना ही निकट आ जाता है।
मैं देख रहा हूं कि सारे जगत में एक आध्यात्मिक पुनरूत्थान निकट है और एक नये मनुष्य का जन्म होने के करीब है। हम उसकी ही प्रसव-पीड़ा से गुजर रहे हैं।
पर, यह पुनरुत्थान हम सबके सहयोग की अपेक्षा में है। वह हम से ही आने को है, और इसलिए हम केवल दर्शक ही नहीं हो सकते हैं। उसके लिये हम सब को अपने में राह देनी है।
हम सब अपने आपको आलोक से भरें तो ही वह प्रभात निकट आ सकता है। उसकी संभावना को वास्तविकता में परिणत करना हमारे हाथों में है।
हम सब भविष्य के उस भवन की ईटं हैं। और, हम ही हैं वे किरणें जिनसे भविष्य के सूरज का जन्म होगा। हम दर्शक नहीं, स्रष्टा हैं।
और, इसलिए वह भविष्य का ही निर्माण नहीं, वर्तमान का भी निर्माण है। वह हमारा ही निर्माण है। मनुष्य स्वयं का ही सृजन करके मनुष्यता का सृजन करता है।
व्यक्ति ही समष्टि की इकाई है। उसके द्वारा ही विकास है और क्रांति है।
वह इकाई आप हैं।
इसलिए, मैं आपको पुकारना चाहता हूं। मैं आपको निद्रा से जगाना चाहता हूं।
क्या आप नहीं देख रहे हैं कि आपका जीवन एक बिलकुल बेमानी, निरर्थक और उबा देने वाली घटना हो गया है? जीवन ने सारा अर्थ और अभिप्राय खो दिया है। यह स्वाभाविक ही है। मनुष्य के भीतर प्रकाश न हो तो उसके जीवन में अर्थ नहीं हो सकता है।
मनुष्य के अंतस में ज्योति न हो, तो जीवन में आनंद नहीं हो सकता है।
हमें जो आज व्यर्थ बोझ मालूम हो रहा है, उसका कारण यह नहीं है कि जीवन ही स्वयं में व्यर्थ है। जीवन तो अनंत सार्थकता है, पर हम उस सार्थकता और कृतार्थता तक जाने का मार्ग भूल गये हैं। वस्तुत: हम केवल जी रहे हैं, और जीवन से हमारा कोई संबंध नहीं है। यह जीवन नहीं है। यह केवल मृत्यु की प्रतीक्षा है। और, निश्चय ही मृत्यु की प्रतीक्षा केवल एक ऊब ही हो सकती है। वह आनंद कैसे हो सकती है? मैं आपसे यही कहने को आया हूं कि इस दुःख-स्वप्न से बाहर होने का मार्ग है, जिसे कि आपने भूल से जीवन समझ रखा है।
वह मार्ग सदा से है। अंधकार से आलोक में ले जाने वाला मार्ग शाश्वत है।
वह तो है, पर हम उससे विमुख हो गये हैं। मैं आपको उसके सन्मुख करना चाहता हूं।
वह मार्ग ही धर्म है। वह मनुष्य के भीतर दीया जलाने का उपाय है। वह मनुष्य की दिशाहीन नौका को दिशा देना है।
महावीर ने कहा है:
जरामरण वेगेणं, बुज्‍झमाणाण पाणिणं।
धम्मो दीवो पइट्ठा य, गई सरणमुत्तमं।।
- 'संसार के जरा और मरण के वेगवाले प्रवाह में बहते हुए जीवों के लिए धर्म ही एकमात्र द्वीप है, प्रतिष्ठा है, गति है और शरण है।’
क्या आप उस प्रकाश के लिए प्यासे हैं, जो जीवन को आनंद से भर देता है? और, क्या आप उस सत्य के लिए अभीप्सु हैं, जो अमृत से संयुक्त कर देता है?
मैं तब आपको आमंत्रित करता हूं- आलोक के लिए और आनंद के लिए और अमृत के लिए। मेरे आमंत्रण को स्वीकार करें! केवल आख ही खोलने की बात है, और आप एक नये आलोक के लोक के सदस्य हो जाते हैं।
और कुछ नहीं करना है, केवल आख ही खोलनी है। और कुछ नहीं करना है, केवल जागना है और देखना है।
मनुष्य के भीतर वस्तुत: कुछ बुझता नहीं है- और न ही दिशा ही खो सकती है। वह आख बंद किये हो तो अंधकार हो जाता है और सब दिशाएं खो जाती हैं। आख बंद होने से वह सर्वहारा है और आख खुलते ही सम्राट हो जाता है।
मैं आपको सर्वहारा होने के स्वप्न से, सम्राट होने की जागृति के लिए बुलाता हूं। मैं आपकी पराजय को विजय में परिणत करना चाहता हूं और आपके अंधकार को आलोक में, और आपकी मृत्यु को अमृत में-लेकिन क्या आप भी मेरे साथ इस यात्रा पर चलने को राजी हैं?

मंगलवार, 30 अक्टूबर 2012

सुखमय जीवन का खजाना

स्वस्थ जीवन के लिए प्रातः सूर्योदय से पहले जागना चाहिए तथा नित्य संध्या करनी चाहिए। वेद मंत्रों में वह खजाना भरा पड़ा है जिससे मनुष्य अपना भौतिक जीवन सुखमय करने के साथ-साथ आत्मिक सुख की अनुभूति भी करता है।

मंत्र शक्ति परमाणु से भी अधिक शक्तिशाली होती है वह विकृत वातावरण में सुकृति ला देती है। मनुष्य के तन, मन और हृदय को शुद्ध कर बुद्धि को श्रेष्ठ मार्ग में प्रचोदित करती है। इसीलिए गायत्री मंत्र में सविता यानी सूर्य उपासना करते हुए प्राप्त की जाती है। हमारी बुद्धि को श्रेष्ठ मार्ग की और प्ररित करती है।

जो लोग सूर्योदय से पहले शय्या त्याग कर नित्य कर्म कर लेते हैं उनकी बुद्धि स्वतः निर्मल हो जाती है। प्रातः सूर्योदय से पूर्व तथा सायं सूर्यास्त के समय ही संध्या करनी चाहिए।

ND
कलियुग में व्यक्ति बहुआयामी होने के कारण अत्यंत व्यस्त हो चुका है। वह भौतिक उन्नति के जितने शिखर में पहुंच रहा है उतना ही आध्यात्मिक अवनति की ओर बढ़ रहा है।

इसका मुख्य कारण है वह आत्मकल्याण के कार्यों से जी चुरा रहा है। इसलिए हमें आत्मकल्याण का मार्ग अपना कर मंत्रों से सुखमय जीवन का निर्माण करना चा‍हिए।

रविवार, 1 अप्रैल 2012

सुनीता







सुनीता



मेरे जीवन में आई जब से अपनापन समझ आया ,मेरी जीन्दगी बन गयी है ,सुनीता

उदभव



उदभव का तात्पर्य है एक प्रारम्भ नई सुबह का ,है एक उन्नति , मुस्किल परिस्थितियों में पूर्ण नियन्त्रण व् नैतिक रूप से समुचित रह लिए , है एक उल्लेखनीय घटना ,जो धेर्य एवं प्रसन्नता एक ही समय में प्रदान कराए,

बुधवार, 24 अगस्त 2011

मल्टी लेवल मार्केटिंग क्या है? आर सी एम ही क्यों?

मल्टी लेवल मार्केटिंग क्या है? आर सी एम ही क्यों?मल्टी लेवल मार्केटिंग की सुरुवात कनाडा में १९५९ हुई, एम.एल.एम. का मतलब है की कोई भी प्रोडक्ट जोकंपनी बनाती है वो सीधाकंजूमर के पास पहूँचता है जिसमे कोई बिचोलिया जैसे स्टॉकिस्ट, व्होलसेलर,रिटेलर इत्यादी नहीं होता तथा कंपनी से प्रोडक्ट मार्केट भाव से ३०% से ५०% सस्ता मिलता है तथा उसमे कोई मिलावट नहीं हो सकती क्योकि बीच में कोई बिचोलिया नहीं होता तथा कंपनी के गोदाम से सीधा माल ग्राहक के पास आता है तथा कंपनी के विज्ञापनकर्ता आप खुद है इसलिए कंपनी आपको ३०% से ४०% कमीशन के रूप में डिस्ट्रीबुट करती है. आप एक उदहारण देखे के एक कंपनी १ किलो चाय २००रु. में बेच सकती है लेकिन उसके खरीददार कम है तो कंपनी क्या करेगी किसी क्रिकेट खिलाडी,फिल्म हीरो,हेरोइन से उसका विज्ञापन मीडिया जैसे टीवी न्यूजपेपर में करवाएगी जिसे देखकर दर्शक/ग्राहक ये मान लेता है ये विज्ञापन सही है और २००रु. किलो की चाय २५०रु. से ३००रु.किलो दे कर खरीद लेता है जिसमे ३०% से ४०% कीमत विज्ञापन की भी चुकाता है आप में से बहुत से लोग ये नहीं जानते की एक विज्ञापन करने का ये सेलेब्रिटी कई करोड़ रु. लेते है जिसका बोझ सीधा हमारी जेब पर पड़ता है अगर अनुमान लगाया जाये तो एक आदमी जो कम से वेतन पाता है अपनी पूरी जीन्दगी की ३०% से ४०% कमाई लगभग २० से २५ लाख रु विज्ञापन का चूकाता है जिसका उसे पता ही नहीं चलता तथा हमें सहज ही इसका विश्वास ही नहीं होता.आप एक उदहारण देखे के एक कोल्ड ड्रिंक की बोटल की लागत सिर्फ १रु पड़ती है क्योकि उसमे सिर्फ जीरा वाटर होता है वो भी बासी और उसमे किट नाशक मिलाया जाता है ताकि कोल्ड ड्रिंक सड़े नहीं,वो एक रु. का बासी पानी हम १०रु में पीते है क्योकि सेलेब्रिटी विज्ञापन में पीने को कहते है. इस के लिए कुछ हद तक हम जिम्मेदार है क्योकि भारत में ग्राहक जागरूकता की कमी है इस से बचने का सिर्फ एक ही तरीका है के कंपनी और ग्राहक एक हो जाये तथा बीच के बिचोलियों को हटा दिया जाये और वो तरीका है कोई अच्छी मल्टी लेवल मार्केटिंग कंपनी से जुड़ने का .मल्टी लेवल मार्केटिंग का इतिहास :लगभग ५० वर्ष पहले कनाडा में सुरु हुआ और सभी यूरोपीयन देशो में काफी सफल है तथा वह बड़ी बड़ी दिग्गज कंपनियों के प्रोडक्ट जैसे फोर्ड,कोकाकोला,बेल कोम्पुटर इत्यादि मल्टी लेवल मार्केटिंग के जरिए बेचे जाते है तथा वहा के स्कूलों में मल्टी लेवल मार्केटिंग कम्पलसरी सब्जेक्ट होता है. इंडिया में एम.एल.एम. लगभा १० वर्ष पुराना है.इंडिया में एम.एल.एम. को शक कीनजरो से देखा जाता है क्योकि इन दस वर्षो में बहुत सी एम.एल.एम. कंपनीया कुकुरमुत्ते की तरह उगी और चली गयी कारण सिर्फ एक कंपनियों का ढगी रवैया तथा भारत के उपभोगता संस्कृति के प्रतिकूल वातावरण.बहुत मंहगे और अनावश्यक प्रोडक्ट एक आम भारतीय उपभोगता के किस काम के,उसे तो वो प्रोडक्ट चाहिए जो उसे देनिक काम में आते हो.तो फिर कोनसी एम.एल.एम. का चुनाव करे जो भारत के उपभोगता संस्कृति के अनुकूल हो तो आओ देखे अच्छी मल्टी लेवल मार्केटिंग(एम.एल.एम.) किसे कहते है?१.कंपनी का इतिहास:कंपनी का इतिहास पुराना होना चाहिए,उसके मालिको का इतिहास कैसा है उसकी मार्केट में क्या इज्जत है,कही कंपनी फर्जी तो नहीं है उसका हेड ऑफिस और उसकी ब्रांच कह्या कह्या है.२.कंपनी के प्रोडक्ट:कंपनी के क्या क्या प्रोडक्ट है,क्या उन्हें खुद बनाती है,क्या कंपनी के प्रोडक्ट एक आम भारतीय उपभोगता के काम के है,क्या कंपनी के प्रोडक्ट बाज़ार से बहुत मंहगे है? एक आम उपभोगता को चाहिए 10 से १५रु वाला साबुन,अगर उसे कहा जाये की ५०रु वाला साबुन उत्तम है और कम गलता है तो तो एक आम उपभोगता 10 से १५रु वाला साबुन ही खरीदेगा ५०रु वाला नहीं क्योकि यही उसकी संस्कृति है और यही उसकी जेब की हैसियत.कंपनी ऐसा प्रोडक्ट बनाये जो एक आम भारतीय उपभोगता के काम के हो और उसकी उसकी जेब की हैसियत के,हमारे घर में साइकिल तक नहीं और कंपनी कार लिक्विड क्लीनर बेचे इसमें तो कोई तुक नहीं.३.कंपनी के प्रोडक्ट की क्वालिटी: कंपनी के प्रोडक्ट की क्वालिटी उत्तम होनी चाहिए,कही ऐसा तो नहीं कंपनी खुद का या किसी दूसरी कंपनी का घटिया प्रोडक्ट थमा रही हो.४.कंपनी का खुद का प्रोडक्ट केटालोग :कंपनी का खुद का मेनुफकचरिंग केटालोग होना चाहिए तथा कंपनी खुद प्रोडक्ट बनानी चाहिए,अगर किसी कंपनी के प्रोडक्ट की मार्केटिंग कर रही है तो कंपनी उस प्रोडक्ट की क्वालिटी कण्ट्रोल को चेक करे ताकी ग्राहक को घटिया प्रोडक्ट नहीं मिले.५.कंपनी के साथ जुड़े हुए डिस्ट्रीबुटर की संख्या :एक अच्छी कंपनी के साथ बहुत सारे डिस्ट्रीबुटर धीरे धीरे और स्थाई रूप से जुडेंगे,यदि किसी कंपनी के साथ बहुत सारे डिस्ट्रीबुटर अचानक एक साथ जुड़ जाये या अचानक एक साथ छोड़ कर चले जाये तो कंपनी की विस्वसनीयता पर शक हो जाता है.क्योकि एक अच्छी कंपनी कभी भी लुभावने वादे लेकर नहीं आती,वह तो लेकर आती है काम और विश्वास.अगर डिस्ट्रीबुटर विश्वास के साथ काम करे तभी इन्कम आये तह बिना मेहनत कभी इन्कम न आये क्योकि सफलता हमेशा दर्द की कोख से जनम लेती है .६.कंपनी का पॉलिटिकल बकग्राउंड: कंपनी ऐसी हो की वहा की राज्य सरकार जिसके खिलाफ न हो,या वहा की किसी सरकार द्वारा उसपर किसी प्रकार का प्रतिबन्ध या बेन (BAN ) नहीं लगाया गया हो.७.कंपनी के प्रोडक्ट की मांग : कही कंपनी ऐसा प्रोडक्ट तो नहीं बनाती जिसकी मार्केट में कोई डिमांड न हो,या उस देश की संस्कृति के अनुकूल न हो.यदि भारत में कोई कंपनी ऐसा प्रोडक्ट लाती है जैसे महँगी ताकत की दवाये,ब्लड प्रेशर ब्रासलेट,डायबिटीज़ की दवा,मंहगे क्लब की मेम्बरशिप,विदेश यात्रा पैकेज,वजन कम या बढ़ने की दवा इत्यादि तो आप मुझे बताये की भारत में कितने लोग इस तरह की कंपनी के प्रोडक्ट लेंगे.यहाँ तो ऐसी कंपनी चलेगी जो रोजमर्रा की चीजे जैसेकपडा,चाय,तेल,साबुन,शेम्पू,कॉस्मेटिक,लिक्विड क्लीनर,खाने कासामानजैसेबिस्कुट,नमकीन,मीठाई,गरम मसाला,चमड़े का सामान (जूते,बेल्ट,बैग,पर्स) रेडीमेड गारमेंट जैसे ( जींस,पेंट,शर्ट,टाई,टॉप,शूट,बनियान,अंडरगारमेंट),गर्म कपडे,इलेक्ट्रॉनिकआय़टम (घडी,कोम्पुटर ,लैपटॉप प्रिंटर) तथा जो कंपनी सर्विससेक्टरनभूले जैसेइंश्योरेंस,मोबाइल,बैंकिंग,ऑटोमोबाइल ,होसपीटल होटल्स,हाऊसिंग,होम अप्लाईनसेस,टीवी चेनल्स इत्यादि.अगर कोई कंपनी उपरोक्त सभी प्रोडक्ट या उनमे से बहुत सारे प्रोडक्ट की (M.L.M.) करती है तो निश्चित रूप से आनेवाले दिनों में सफल होगी .R.C.M. ही क्यों की जाये:अ़ब सवाल ये उठता है की कोनसी M.L.M.की जाये तथा R.C.M. ही क्यों की जाय,जवाब बिलकुल सीधा है उपरोक्त सभी सवालो का जवाब सिर्फ यही कंपनी दे सकती है,कंपनी १९७७ से कपडो के व्यवसाय में लीन है तथा सन २००० से मल्टी लेवल मार्केटिंग कर रही है तथा भारत की टॉप टेन(TEN) कपडा बनाने वाली कंपनी में से एक,तथा नमक से लेकर लैपटॉप तक सभी सामान एक ही दुकान में उपलब्ध,८० लाख से १ करोड़ के लगभग डिस्ट्रीबुटर,५००० RCM पीकअप सेंटर ,८०० RCM बाज़ार, भारत के २९ राज्यों ,९००० शहरो में बिज़नस,आनेवाले समय में RCM मेगा मार्ट खोलने की तैयारी,लगभग ७००० करोड़ की कंपनी,T.D.S.देने के मामले में RELIANCE के बाद नंबर दो पर,भारत की पहली कंपनी जिसने कभी किसी से LOAN नहीं लिया तथा भारत की पहली कर्ज रहित कंपनी.आज के युग में जहा बडी बडी नामी कंपनी BANK लोन लेकर व्यवसाय करती है वहा RCM बिना बैंक लोन लिए इतना विशाल व्यवसाय खडा करने में सफल हुई है .अगर आपकी मंजिल M.L.M. है तो आप के सवालो का जवाब है R.C.M.(RIGHT CONCEPT MARKETING) क्योकि यही मार्केटिंग करने का सही तरीका है