बुधवार, 24 अगस्त 2011

RCM BUSINESS SOME FACTS

RCM( RIGHT CONCEPT MARKETING) FASHION SUITINGS PVT।LTD।,BHILWARA(RAJASTHAN) FOUNDER: SHRI TILOK CHAND छाबरा 1977-ESTABLISHED FASHION SUITINGS PVT LTD AND STARTED TEXTILE BUSINESS। 1986-ESTABLISHED OWN TEXTILE MANUFACTURING UNIT। 2000-ACHIEVED PRODUCTION OF 1 CRORE METRE CLOTH PER ANNUM। 2000 AUG:CLOSED OLD SLM(SINGLE LEVEL MARKETING ) SYSTEM AND STARTED MULTI LEVEL MARKETING (MLM)। 2002:COMPANY BROGHT FMGC PRODUCTS IN THE MARKET UNDER RCM LOGO।TODAY SALT TO LAPTOP EVERT THING IS AVAILABLE IN RCM SHOP/BAZAR UNDER ONE ROOF। RCM: WORLD 1ST TEXTILE COMPANY ENGAGED IN MLM। RCM: AMONG TOP 10 TEXTILE MANUFACTURING CO।IN INDIA। RCM: PRESENT CAPACITY 3 CRORE METRE CLOTHS PER ANNUM।AND IN COMMING YEARS REACHING TOWARDS TOP OF THE TEN।र्क्म१DISTRIBUTORS,4000 RCM SHOPS,800 BAZARS,MORE THAN 600 PRODUCTS,STRONG BUSINESS NETWORK IN MORE THAN 9000 CITIES AND 29 STATES IN INDIA।RCM:MORE THAN ५ 000 CRORE COMPANY।RCM:ENGAGED IN SERVICE SECTORS SUCH AS ,TELECOMMUNICATIONSINSURANCE AND IN COMMING DAYS WILL ENTER IN PETROLEUM,EDUCATION,ELECTRONICS,HOTELS AND HOSPITALS,AUTOMOBILES,BANKING,HOUSING,TV।CHANNELS,HOME APPLIANCES,AIRLINES ETC।

MULTI LEVEL MARKETING(M.L.M.)MULTI LEVEL MARKETING(M.L.M.) का इंडिया में स्कोप: का इंडिया में स्कोप:

MULTI LEVEL MARKETING(M.L.M.) का इंडिया में स्कोप:मल्टी लेवल मार्केटिंग की शुरूवात सन १९५९ में कनाडा में हुई थी तथा तब से विदेशो में यह सिस्टम काफी लोकप्रिय हुआ है प्रतिशत के हिसाब से यह कितना विकसित है आओ देखे :देश M.L.M.का प्रतिशत अमेरिका 60%चीन 21% भारत 01% * सबसे कम भारत में यूरोप व अन्य देश 18% कुल 100% मल्टी लेवल मार्केटिंग का विकास सबसे अधिक अमेरिका में हुआ है वहां पर बड़ी बड़ी FAMOUS कंपनिया अपना प्रोडक्ट M.L.M. के जरिए बेचती है जैसे फोर्ड,कोकाकोला ,बेल कोम्पुटर इत्यादि वहां पर इसके स्कूल व कोलेज में कोर्सेस होते है भारत में यह ORGANISED INDUSTRIES का दर्जा हासिल नहीं कर पाई है तथा अभी भी लोग इसे शक की निगाह से देखते है उसका कारण है की बहुत सी fraud कंपनिया आयी और देश की जनता को ठग कर चली गयी इसलिए एक आम आदमी का अनुभव M.L.M. कंपनियों के प्रति खट्टा है,उसका कारण है देश में शिक्षा,प्रशिक्षण,जनजागरण का आभावअभी भी 100 में से सिर्फ 1 आदमी M.L.M. में सफल हो पाते वो भी सही ट्रेनिंग के बादइसका कारण है है M.L.M. में ज्वाइन करने के तरीके,आओ देखे:ज्वाइन करने का तरीका ज्वाइन करने का प्रतिशत BY OBLIGATION(दोस्त,रिश्तेदारों द्वारा): 30%BY FORCE (बॉस,अफसर,सरकारी अधिकारी द्वारा) : 25%BY MISGUIDENCE(गलत कांसेप्ट बताकर ) : 20%TO GIVE A TRY(या पीछा छुडाने ने के लिए) : 15%TO MAKE A SERIOUS CARREER : 10% *** (ये व्यक्ति सफल होंगे )TOTAL 100%जो व्यक्ति इसे सीरियस हो कर बिजनस करियर के रूप में ज्वाइन करेगा वही SUCCESS होगा M.L.M. में कामयाब होने के लिए क्या क्या योग्यता होनी चाहिए?१.आपके अंदर काम करने की BURNING DESIRE(मजबूत इरादे )होने चाहिए क्योकि मजबूत इरादों से ही ज़ंग जीती जाती है दुनिया की ऊँची से ऊँची चोटी इन्सान के इरादों से ऊँची नहीं है२.यह बिजनेस लोगो को तलाशने का नहीं तराशने का बिजनेस है. किसी को ये सोच कर JOIN न कराये की ये मुझे कामयाब बनाएगा बल्कि ये ये सोच कर JOIN कराये की मुझे इसको कामयाब बनाना है,क्योकि वो कामयाब होगा तो आप भी कामयाब होगे ३.स्वार्थ की भावना नहीं होनी चाहिए,लेने वाला नहीं देने वाला होना चाहिए तभी आदमी लीडर बनेगा ( HELPING OTHERS TO LIGHT THEIR FUTURE)4.सिस्टम के द्वारा बताये गए टूल्स जैसे टेप,सीडी,विडियो,बुक्स का प्रयोग रोज करे,सेमिनार,फंक्शन्स अटेंड करे५.बिज़नस के लिये थोडा सा वक़्त निकाले,अभी थोडा सा COMPROMISE करे बाद में जिंदगी में कोई COMPROMISE करना न पड़े थोडी थोडी कुर्बानी करके धीरुभाई अम्बानी ने ६५ हजार करोड़ रु का साम्राज्य (EMPIRE) खडा कर दिया६.सुरुवात आसान हो तो अंत ख़राब होता है,नरक के रास्ते आसान होते है पर स्वर्ग के रास्ते कठिन होते हैइस बिजनस को सुरु करने में सुरुवात में थोडी कठिनाई होती है पर बाद में सुख की अनुभति होती है७.'MAGIC WORDS'-SORRY,THANK YOU :जादुई शब्द सॉरी,थैंक्यू का प्रयोग करने में देरी न करे अगर समय रहते रावण ने सॉरी कहा होता तो रामायण नहीं होती और समय रहते दुर्योधन ने सॉरी कहा होता तो महाभारत नहीं होतीक्योकि तारीफ करेंगे तो क्वालिटी में बढोतरी होगी और निंदा करेंगे तो EGO(अहम् ) का जनम होगा और अहम् इस बिजनेस का शत्रु है८.जब जब कोई नया काम होता है तो जमाना उसपर हँसता है,आप लोगो के हँसने पर न जाये क्योकि जब जब जमाना हँसा है इतिहास रचा है९.SELF MOTIVATION:जब तक आप खुद को MOTIVATE नहीं करोगे तब दूसरो को MOTIVATE नहीं कर पाओगेएक दुबले पतले आदमी ने पुरे भारत को ऐसा MOTIVATE किया की अंग्रेजो को हिंदुस्तान से खदेड़ दिया जिसे आज हम महात्मा गाँधी के नाम से जानते हैअगर आप साहस करके LEAD करोगे तो लोग आपको अपने आप FOLLOW करेंगेएक अच्छा बीमा एजेंट एक अच्छा MOTIVATOR होता है10.समाज में एक अछी छवि(GOODWILL,IMAGE) बनाये,आपकी सच्चाई,ईमानदारी,निस्वार्थ स्वाभाव देखकर कोई आपके व्यक्तित्व से प्रभावित होकर ऐसे ही ज्वाइन कर लेगा११.लोगो को भरपूर प्यार व सम्मान देना है और विश्वास जगाना है और अच्छा रिलेशन BUILT करना हैक्योकि एक रिलेशन कई रिलेशन का बीज होता हैअपनी अच्छाई से लोगो की बुराई को ख़त्म कर सकते है यही LEADERSHIP की ताकत है११.हमेशा हँसमुख रहे क्योकि हँसमुख व्यक्ति लीडर बनता है और दुखी व्यक्ति कभी भी लीडर नहीं बन सकताहैकेवल काम करते रहे आपको सही व्यक्ति जरूर मिलेगा "YES THEY ARE RARE BUT THEY ARE"12.बड़ा सोचे(छोटी छोटी आंखे बड़े बड़े सपने):बड़ा सोचेंगे तो बड़ा बनेंगे और छोटा सोचेंगे तो छोटे होंगे,गरीब हमेशा गरीबी के बारे में सोचता है इसलिए गरीब होता है और अमीर हमेशा अमीरी के बारे में सोचता है इसलिएअमीर होता है. शेष शीघ्र ............................

मंगलवार, 23 अगस्त 2011

सुविचार


*iमनुष्य का जीवन विचारों से ही चलता हैं। यदि विचार अच्छे हैं, तो जीवन अच्‍छा बनेगा। यदि विचार खराब हैं तो जीवन खराब हो जायेगा !!!
*उँची सफ़लता उन्हीं लोगों को मिलती है, जो खुद पर विश्‍वास करते हैं, कि हमारे अन्दर परिस्थितियों से कुछ अधिक ताकत है।
*बुद्‍धिमत्‍ता का अर्थ यह नहीं की गलतियाँ होंगी ही नहीं। बल्कि यह है की गलतियों को जल्दी ठीक कर लेंगे। सब से बुद्‍धिमान गलती नहीं करेगा।
*सफ़लता का सूत्र > छोटे से छोटा काम भी पूरी श्रद्‍धा, बुद्‍धि और लगन से करें, ईश्‍वर की कृपा से सफ़लता निश्‍चित मिलेगी।
*जीवन कोई समस्या नहीं है, कि इस को सूलझाय़ा जाये, बल्कि जीवन तो एक सच्‍चाई है, जिस को आनन्द से अनुभव करना चाहिये। आशावादी बनें।
* स्वर्ण हूँ तो क्या हुआ तपना पडेगा, हार बनाना हो तो फ़िर गलना पडेगा ।जिन्दगी तो हर घडी लेगी परीक्षा, जो न दे उस को यहाँ पिटना पडेगा ॥
*सफ़लता के ४ सूत्रः – १. ध्यान से सुनना। २. गहराई से विचार करना। ३. एक सही निर्णय लेना। ४. उस को आचरण में लाना। सफ़लता आपके कदम छुएगी।
*आपत्‍तियों में घबराना नहीं, बल्कि भगवान का धन्यवाद करना चाहिये, क्योंकि उसी समय में तो आप परिश्रम करके विकास कर पाते हैं।
* एक मिनीट हमारे जीवन को नहीं बदल सकता, लेकिन एक मिनीट में लिया गया निर्णय हमारे जीवन को बदल सकता है। खूब विचार करके निर्णय लें।
* उन्‍नति के लिये प्रतिदिन आत्म निरीक्षण करें > आज कौन सा अच्छा कार्य नहीं हो पाया जो करना चाहिये था। और कौन सा गलत हुआ जो नहीं करना था।
*कितना भाग्यवान होगा वह व्यक्‍ति जिस का साथी बुद्‍धिमान हो, उस को समझता हो, और उस के सब अच्छे कार्यों में सहयोग देता हो। भाग्यवान बनें।
*आप के पास धन इतना होना चाहिये, कि आप की मुख्य आवश्यकतायें पूरी हो जायें, आवश्यकतायें पूरी हो सकती हैं इच्छाएं पूरी नहीं हो सकती।
* यदि आप चाहते हैं, की लोग आप पर विश्‍वास करें, तो पहले आप उन को यह विश्‍वास दिलायें, की आप उन पर विश्‍वास करते हैं !!!
* "मैं सफ़ल तो हो ही जाऊँगा" ऐसा सोच कर आप उंचे लक्ष्य के लिये पूरी मेहनत नहीं करेंगे, और असफ़ल होने पर निराशा में आ जायेंगे।
*यदि आप जानकारी प्राप्‍त करना चाहते हैं, तो दिमाग में रोज कुछ डालें। यदि ज्ञान प्राप्‍त करना चाहते हैं, तो दिमाग से रोज कुछ (कचरा) निकालें।
*असफ़लताएं वह अवसर हैं, जो हमें सीखाती हैं की अगली बार कार्य को कैसे ठीक करना है। गलती कहाँ हुई और उसको कैसे दूर करें !!!!!
*असफ़लता आप के लिये वरदान है या अभिशाप? यह तो हर एक व्यक्‍ति का अपना दृष्टिकोण है। बुद्‍धिमान लोग इसको वरदान समझ कर आगे बढते हैं।
*यदि आप अपनी असफ़लताओं का परीक्षण करेंगे, तो उन्हीं में आप को कुछ ऐसे बीज मिलेंगे, जो आप की असफ़लताओं को सफ़लताओं में बदल देंगे !!!!!!
*असफ़लताओं की तुलना में हमेशा सफ़लताओं के साथ जीना अधिक कठिन है। जीवन में असफ़लताएं आना तो स्वाभाविक है। फ़िर घबराना क्या !!!!!!!!
*असफ़लता का RISK लिये विना कोई उंची वस्तु आज तक कभी किसी को मिली नहीं और न ही मिलेगी। इसलिये असफ़ल होने पर घबरायें नहीं।
*क्षणिक असफ़लता को पूर्ण असफ़लता न मान लेवें। व्यक्‍ति जीवन में अनेक बार असफ़ल होकर भी पूर्ण असफ़लता से बहुत दूर हो सकता है।
*२ मुख्य कारणों से जीवन में असफ़लता मिलती है। १- जब हम विना सोचे कार्य करते हैं। २- जब हम सोचते ही रहते हैं, और कार्य नहीं करते।
*किया हुआ कर्म कभी निष्फ़ल नहीं होता, और सदा तुरन्त भी फ़ल नहीं मिलता। इसलिये अज्ञानी लोग पाप करने से नहीं डरते। पाप करने से डरो।
*उत्‍तम विचार यूँ ही नहीं आ जाते, उन के लिये गम्भीर चिन्तन चाहिये। जैसे बच्‍चों का निर्माण यूँ ही नहीं हो जाता, उस के लिये घोर परिश्रम चाहिये।
*पुरुषार्थियों के जीवन में कभी कमी नहीं रहती है, यदि कभी कुछ कमी आ भी जाये, तो वे लोग फ़िर मेहनत करके कुछ अधिक ही पा लेते हैं।
*उत्‍तम भविष्य ऐसी वस्तु नहीं है, जिस की आप को प्रतिक्षा करनी पडे। अपने भविष्य के निर्माता आप स्वयं हैं। मेहनत कीजिये > भविष्य बनाईये।
*वृद्‍धावस्था में ज्ञान के कारण सम्मान मिलता है। परन्तु यदि वृद्‍ध व्यक्‍ति में ज्ञान न हो तो वह वृद्‍धावस्था केवल बाल सफ़ेद ही करती है।
*"सीडीयाँ उन के लिये बनी हैं, जिन्हे सिर्फ़ छत पर जाना है।आसमाँ पर हो जिनकी नजर, उन्हें तो रास्ता खुद बनाना है” ॥
*अच्छा हृदय और अच्छा स्वभाव, दोनों चाहियें। अच्छे हृदय से कई रिश्तें बनेंगे, और अच्छे स्वभाव से वे रिश्‍ते जीवन भर टिकेंगे।
*सब कुछ आसान है, यदि आप पुरुषार्थी हैं। सब कुछ कठिन है, यदि आप आलसी हैं। कृपया पुरुषार्थी बनें, आलसी नहीं।
*१. हजारों मील की लंबी यात्रा केवल १ कदम से शुरू होती है। अपनी जीवन यात्रा को शुरु करने के लिये कम से कम १ कदम तो बढायें !!!!!
*२. कला हमें उच्‍च स्तर पर ले जायेगी। परन्तु उत्‍तम चरित्र ही हमें उस उच्‍च स्तर पर टिकाये रखेगा। कृपया अपना चरित्र उत्‍तम बनायें।
*अपने जीवन को कष्टमय और तनावयुक्‍त बनाने का सबसे बडा कारण है > दूसरों से ऐसी आशाएं रखना कि – वे आप की इच्छानुसार सब कार्य करेंगे।
*जिन परिस्थितियों को आप पसन्द नहीं करते, उन में आप कैसा व्यवहार करते हैं? उस से आप की योग्यता की परीक्षा हो जायेगी, आप कहाँ खडे हैं?
*जो सीखना छोड देता है, वह वृद्‍ध हो गया है, चाहे वह २० वर्ष का हो या ८० का। सीखते रहने की प्रवृत्‍ति आप को जवान बनाये रखेगी।
*एक छोटा सा छिद्र पानी की पूरी बालटी को खाली कर देता है, ऐसे ही थोडा सा अभिमान एक उत्‍तम हृदय की सारी उत्‍तमता को नष्ट कर देता है।
*जीवन में हर चीजें नाशवान है, यदि सुख मिल रहा है, तो ठीक है। यदि दुःख भी मिल रहा है, तो वह भी सदा रहने वाला नहीं है।
*जो लोग वचन देने में देर लगते हैं, वे वचन का पालन करने में विश्‍वास करने के योग्य होते हैं। जल्दी वचन न दें, देना तो पूरा करें।
*जो व्यक्‍ति बहानें बनाकर पीछे नहीं लौटता, कठिनाइयों से पूरा संघर्ष करता है, सफ़लता उसके कदम चुमती है। सफ़ल बनें।
* "चुनौतियाँ" जीवन को रुचिकर बनाती हैं, और उन पर "विजय" जीवन को अर्थपूर्ण बनाता है। जीवन के कठिन निर्णय बुद्‍धिपूर्वक लेवें।
*अपने आप से केवल एक ही प्रश्‍न पूँछें > "सफ़लता प्राप्‍त करने के लिये त्याग और तप करने को क्या आप तैय्यार हैं ?" यदि हाँ, तो सफ़लता निश्‍चित है।
* यदि आप जीवन में कुछ विशेष परिवर्तन लाना चाहते हैं, तो कुछ विशेष कार्य करें। क्या ? दूसरों को सुख देने का अभ्यास बनायें।
*जो लोग यह कहते हैं, कि “यह कार्य कभी नहीं हो सकता”। वास्तव में या तो वे आलसी हैं, या उनके कार्य में किसी ने बाधा डाली है।
*दुराभिमानी लोगों की १ विशेषता > वे दूसरों की प्रसन्‍न कभी नहीं करतें। नम्र लोगों की १ खूबी > वे दूसरों की निन्दा कभी नहीं करतें।
*जीवन में २ रास्तें हैं। १ - या तो परिस्थितियों के साथ चलो, और खुश रहो। २ - या परिस्थितियों को बदलने की जिम्मेदारी लो। शिकायत मत करो !!!!!
*आप के चरित्र की सही पऱीक्षा तब होती है, जब यह पता चले कि - आप उन लोगों के लिये क्या करते हैं, जो आपके लिये कुछ भी नहीं कार सकते।
*आप को प्रसन्‍न रहने की आदत स्वयं ही बनानी होगी। कोई दूसरा आप को सुख नहीं दे सकता। आप की मेहनत कोई दूसरा नहीं कर सकता। स्वयं सुखी बनें।
* जीवन उन के लिये मूल्यवान नहीं है, जो दूसरों के सुख में हिस्सेदार बनते हैं। बल्कि उन के लिये है, जो दूसरों के दुःख में उन का साथ देते हैं।
*सामान्य स्थितियों से गुजरना कोई बडी बात नहीं है। कलाकारी तो तब है, जब आप कठिन परिस्थितियों में से सकुशल बाहार आ जायें।
*अपनी मेहनत से प्राप्‍त संपत्‍ति से जो सुख मिलता है, वह दूसरों की मेहनत से कमाई संपत्‍ति का भोग करने से कभी नहीं। स्वयं मेहनत करें।
*केवल स्वप्‍न देख देख कर लम्बा जीने से अच्छा है, कम जीकर कुछ इतिहास बनाना। भले ही कम जीयें, परन्तु कुछ इतिहास अवश्य बनायें।
*"अभ्यास" व्यक्‍ति को "कुशल" नहीं बनाता। बल्कि "सही अभ्यास" व्यक्‍ति को "कुशल" बनाता है। सही चीजों का अभ्यास करें, गलत का नहीं।
*बीती दुःखदायक बातों को याद करने से दुःख बढता हैं, उनको याद न करें। बीती अच्छी घटनाओं को याद करके उनसे प्रेरणा लेकर उत्साही बनें।
*जिससे आप प्रेम करते हैं, उसको दुःख न देवें, दुःख देने में कुछ ही क्षण लगेंगे, लेकीन उसका प्रेम वापस प्राप्‍त करने में कई वर्ष लग जायेंगे।
*एक छोटी यात्रा भी आप के लिए कठिन होगी, जब आप यात्रा में अकेले होंगे। एक लम्बी यात्रा भी आप के लिए आसान होगी, जब कोई साथी आप के साथ होगा।
* आश्‍चर्य > जब कोई हमारे दिल में प्रवेश करता हैं, तो दिल हलका लगता हैं। और जब कोई हमारे दिल को छोड देता हैं, तो यह भारी हो जाता हैं।
*भगवान् ने आपकी सभी इच्छित वस्तुएं नहीं दीं, परन्तु आवश्यक वस्तुएं तो सब की सब दीं। इसलिये भगवान् का धन्यवाद अवश्य करें।
*जब आप दुःखी होते हैं, तो दूसरों से प्रेम चाहते हैं। जब दुसरे दुःखी होते हैं, क्या तब आप दूसरों को अपना प्रेम बांटते हैं? हैं न आश्‍चर्य!
*उन्‍नति की जाँच करने का सही तरिका हैं “तुलना”। यह तुलना दूसरों से नहीं करनी, बल्कि अपने ही बीते कल के दिन से, आज के दिन की करें !!!!!
*अपनी समस्याओं के बारे में दूसरों से शिकायत न करें, आधे से अधिक समस्याएं आपने स्वयं उत्पन्‍न की हैं। आत्म निरीक्षण से उन्हें दूर करें।
*प्रत्येक चुनौतियों को जीत लेने पर आप कुछ और मजबूत, अधिक अनुभवी और अधिक तैय्यार हो जाते हैं, अपनी बाकी जीवन यात्रा को पूरा करने के लिये।
*जो गलतियाँ कर चुके हैं, उनका तो दण्ड भोगना ही पडेगा। कम से कम इतना तो संकल्प कर ही सकते हैं, कि अब और गलतियाँ नहीं करेंगे।
*अपनी तुलना किसी भी व्यक्‍ति से न करें, यदि आप ऐसा करते हैं, तो आप अपना ही अपमान कर रहे हैं। संसार में हर व्यक्‍ति स्पेशल = अलग ही हैं।
*दूसरों के गुण देखें। यदि आप सब में ही दोष देखेंगे, तो किसी के भी साथ नहीं रह पायेंगे। जिनके साथ रहते हैं, उनके गुण देखें दोष नहीं।
*४ पर हमेशा विश्‍वास रखें। माता, पिता, सच्‍चें गुरु और ईश्‍वर। ये कभी दुःख नहीं देंगे। जो इन की बात नहीं मानेगा, वह ज़रूर दुःखी होगा।
* ४ चीजें कभी न तोडे = विश्‍वास, वचन, सम्बन्ध और दिल। जब ये चीजें टूटती हैं, तो आवाज़ तो नहीं आता, लेकिन कष्ट बहुत होता हैं। किसी से प्रेम करना हो तो दिल से करो, सिर्फ़ ज़ुबान से नहीं। किसी पर गुस्सा करना हो तो सिर्फ़ ज़ुबान से करो, दिल से नहीं। सुखी रहोगे।
* बुरा समाचार > समय उडता हुआ भागा जा रहा हैं। अच्‍छा समाचार > पायलट आप हैं। जिधर चाहें, उधर ही समय का सदुपयोग कर सकते हैं।
*सभी पर विश्‍वास करना खतरनाक हैं। किसी पर भी विश्‍वास न करना उससे भी अधिक खतरनाक हैं। खुद पर और ईश्‍वर पर अवश्य विश्‍वास करें।
* हर व्यक्‍ति सारी दुनियाँ को बदल देना चाहता हैं, परन्तु अपने आप को कोई बदलाना नहीं चाहता। अपने आप को बदलने से ही सुख मिलेगा।
*"हमेशा FIRST आना" ही जीतने का अर्थ नहीं हैं, जीतने का यह भी तो अर्थ हैं, कि अब आप "पहले से अधिक अच्छ काम करने लगे हैं।"
*प्रेम करना सीखें > यदि हम दिखने वाले व्यक्‍ति से प्रेम नहीं कर सकते, उससे घृणा करते हैं, तो न दिखने वाले ईश्‍वर से कैसे प्रेम कर पायेंगे?

शनिवार, 20 अगस्त 2011

जीवन क्या है ?




ना ज़मीन, ना सितारे, ना चाँद, ना रात चाहिए,दिल मे मेरे, बसने वाला किसी दोस्त का प्यार चाहिए, ना दुआ, ना खुदा, ना हाथों मे कोई तलवार चाहिए,मुसीबत मे किसी एक प्यारे साथी का हाथों मे हाथ चाहिए,
कहूँ ना मै कुछ, समझ जाए वो सब कुछ,दिल मे उस के, अपने लिए ऐसे जज़्बात चाहिए, उस दोस्त के चोट लगने पर हम भी दो आँसू बहाने का हक़ रखें,और हमारे उन आँसुओं को पोंछने वाला उसी का रूमाल चाहिए, मैं तो तैयार हूँ हर तूफान को तैर कर पार करने के लिए,बस साहिल पर इन्तज़ार करता हुआ एक सच्चा दिलदार चाहिए, उलझ सी जाती है ज़िन्दगी की किश्ती दुनिया की बीच मँझदार मे,इस भँवर से पार उतारने के लिए किसी के नाम की पतवार चाहिए, अकेले कोई भी सफर काटना मुश्किल हो जाता है,मुझे भी इस लम्बे रास्ते पर एक अदद हमसफर चाहिए यूँ तो 'मित्र' का तमग़ा अपने नाम के साथ लगा कर घूमता हूँ, सी .आर .आर .सी .एम .

गुरुवार, 18 अगस्त 2011

इतिहास गवाह है

जय आर सी एम्, दोस्तों ! दोस्तों, किसी भी काम को करने से पहले हमें 4 बातों का जानना जरुरी होता है। क्या है? क्या दे सकता हें ? क्यों करें ? कैसे करें ? तो अब हम बात कर रहें हैं की आर सी एम् "क्या है" के लिए पड़ें RCM PLAN इसी ब्लाग पर। क्या दे सकता है के लिए पढें निर्णय आपका इसी ब्लॉग पर। क्यों करें की हम बात करेंगें दोस्तों, इतिहास गवाह है, बड़े बुजुर्गों से सुना भी है की जब लोगो की इनकम के ये आंकडे चलते आए और अब देख भी रहे हैं :

सन्
जीवन शैली
इनकम
जीवन शैली
1940
5/-
बहुत अच्छा सा सरकारी
50/-
मौज करते थे
1960
50/-
बहुत अच्छा नहीं था
500/-
मौज करते थे
1980
500/-
वो तंग थे
5000/-
मौज करते थे
2000
5000/-
वो भी तंगी में थे
50000/-
मौज करते थे
सावधान
सावधान
!! सावधान !!
सावधान
सावधान
सन् ,2020,......भी आने वाला है, तब 50000/=रूपये महीने की जिसकी इनकम होगी वों दाल रोटी खायेगा और 500000/=रूपये {पांच लाख रूपये महिना जिसकी इनकम होगी वों मौज करेगा अब देखें की हर 20. साल के बाद एक 0 लगी है इस O की रफ्तार को पहचानने की जरुरत है

सरकारी नौकरी में प्रमोसन कितनी होगी चेक करें
प्राइवेट नौकरी में प्रमोसन कितनी होगी चेक करें .
अपना बिज़नस कैसा है चेक करें .
इतनी बड़ी इनकम केवल और केवल कोई नेटवर्क ही दे सकता हैक्योँ की : अमीर बनने के दो ही रास्ते हैं : 01.आप के पास बहुत सारा पैसा हो और आप कोई कम्पनी लगाइए और लोग आप के लिए काम करें . 02.RCM में आप एक नेटवर्क तैयार करें और उनके साथ मिल कर उनके और अपने सपने साकार करें क्योकि पैसा अमीर आदमी के लिए काम करता है, और आम आदमी पैसे के लिए काम करता हँ। दोस्तों आर सी एम् की ताकत को पहचानो और उस धरती के लाल टी सी छाबडा जी का धन्यवाद करो जिसने कई हजार करोड़ रूपये आप के लिए लगा दिए हैं आप पर विश्वाश करके। अब हमारा काम बचा ही कितना हँ ,केवल नेटवर्क तैयार करना और अपना और अपने बच्चों के सपने साकार करना। अगर ये भी नहीं होता है तो ना करें RCM और आने वाले समय का इंतजार करें और 0 की रफ्तार में बह जाने के लिए तैयार रहें ।

कामयाबी का असली रहस्य

आपकी चाहत :
* क्या आप कामयाब होना चाहते हैं।
* क्या आप बहुत पैसा कमाना चाहते हैं।
* क्या आप नाम कमाना चाहते है।
* क्या आप अपने व्यवसाय में ऊँचाइयों पर पहुंचना चाहते हैं।
* आप मधुर सम्बन्ध बनाना चाहते हैं। प्यार पाना चाहते है।
* मानसिक शांति, शारारिक स्वास्थ्य चाहते हैं।
* या किसी लाइलाज बिमारी से छुटकारा। आप जीवन में क्या चाहते हैं! आपकी चाहत क्या हैं! विश्व के दिग्ग्ज्ज जिन्होंने पुरे विश्व को इन सभी सवालों को समाधान दिए नए आयाम दिए - आपके सवालों के, और चाहत को पाने के रास्ते डॉ प्रवीण शर्मा के अथक प्रयासों द्वारा इन लोगों द्वारा दिए जायेंगे।

आदतें भविष्य निर्माता

क्या आप जानते है की हमारी आदतें हमारे आने वाले भविष्य की निर्माता होती हैं। तथ्य पर गौर करें तो पाएंगे की आदतें ही मनुष्य का निर्माण करती हैं। हमें अपनी आदतों को बदलना होगा। यह इतना आसान नही है किंतु साहसी लोग इस काम को बखूबी अंजाम देतें है। क्योकि बी.सी.जी कहते है की आदतों को ना बदलने की भी हमारी आदत बनी हुई है। आप कामयाब हो सकते है यदि आप अपनी आदत बना ले की हमें RCM के अलावा और कोई प्रोडक्ट इस्तेमाल नही करना, RCM के दो प्लान रोज दिखाने है, पिछले लोगो को फोलो-उप करना है, रोज एक सी डी या टेप सुननी है, सेमीनार मीटिंग में ज्यादा से ज्यादा जाना है, पूरे ड्रेस कोड में रहना है, आदि, एक कहानी मुझे हमेशा मोटिवेट करती है..... एक बार के ग्वाला अपनी गाय के नन्हे बछडे को अपनी गोद में उठा कर रोज तालाब पर स्नान कराने ले जाता था, जब वह बछडा छोटा था तब तो कोई परवाह नही करता था, किंतु धीरे-धीरे जब बछडा बड़ा होकर पुरा बैल बन गया तो भी ग्वाला उसको गोद में उठा कर तालाब पर स्नान कराने ले जाता, लोग उसकी तरफ आँखें फाड़ फाड़ कर देखते थे और हैरान हो जाते की दुबला पतला ग्वाला इस बैल को गोद में कैसे उठा लेता है? दोस्तों इसका राज जानते है क्या था ? उस ग्वाले को बछडा गोद में उठा कर ले जाने की आदत हो गई थी अतः उसे पता ही नही चला की कब बछडा बड़ा होकर बैल बन गया और उसे महसूस ही नही हुआ। दोस्तों RCM बिज़नस में कामयाबी के लिए हमारी ऐसी ही आदतें हमें डालनी होंगी - नो इफ नो बट केवल कर्म। किसी को पता ही नही चलेगा और आपकी पूरे हिन्दुस्तान में जय-जयकार हो जायेगी।