रविवार, 1 अप्रैल 2012

सुनीता







सुनीता



मेरे जीवन में आई जब से अपनापन समझ आया ,मेरी जीन्दगी बन गयी है ,सुनीता

उदभव



उदभव का तात्पर्य है एक प्रारम्भ नई सुबह का ,है एक उन्नति , मुस्किल परिस्थितियों में पूर्ण नियन्त्रण व् नैतिक रूप से समुचित रह लिए , है एक उल्लेखनीय घटना ,जो धेर्य एवं प्रसन्नता एक ही समय में प्रदान कराए,

बुधवार, 24 अगस्त 2011

मल्टी लेवल मार्केटिंग क्या है? आर सी एम ही क्यों?

मल्टी लेवल मार्केटिंग क्या है? आर सी एम ही क्यों?मल्टी लेवल मार्केटिंग की सुरुवात कनाडा में १९५९ हुई, एम.एल.एम. का मतलब है की कोई भी प्रोडक्ट जोकंपनी बनाती है वो सीधाकंजूमर के पास पहूँचता है जिसमे कोई बिचोलिया जैसे स्टॉकिस्ट, व्होलसेलर,रिटेलर इत्यादी नहीं होता तथा कंपनी से प्रोडक्ट मार्केट भाव से ३०% से ५०% सस्ता मिलता है तथा उसमे कोई मिलावट नहीं हो सकती क्योकि बीच में कोई बिचोलिया नहीं होता तथा कंपनी के गोदाम से सीधा माल ग्राहक के पास आता है तथा कंपनी के विज्ञापनकर्ता आप खुद है इसलिए कंपनी आपको ३०% से ४०% कमीशन के रूप में डिस्ट्रीबुट करती है. आप एक उदहारण देखे के एक कंपनी १ किलो चाय २००रु. में बेच सकती है लेकिन उसके खरीददार कम है तो कंपनी क्या करेगी किसी क्रिकेट खिलाडी,फिल्म हीरो,हेरोइन से उसका विज्ञापन मीडिया जैसे टीवी न्यूजपेपर में करवाएगी जिसे देखकर दर्शक/ग्राहक ये मान लेता है ये विज्ञापन सही है और २००रु. किलो की चाय २५०रु. से ३००रु.किलो दे कर खरीद लेता है जिसमे ३०% से ४०% कीमत विज्ञापन की भी चुकाता है आप में से बहुत से लोग ये नहीं जानते की एक विज्ञापन करने का ये सेलेब्रिटी कई करोड़ रु. लेते है जिसका बोझ सीधा हमारी जेब पर पड़ता है अगर अनुमान लगाया जाये तो एक आदमी जो कम से वेतन पाता है अपनी पूरी जीन्दगी की ३०% से ४०% कमाई लगभग २० से २५ लाख रु विज्ञापन का चूकाता है जिसका उसे पता ही नहीं चलता तथा हमें सहज ही इसका विश्वास ही नहीं होता.आप एक उदहारण देखे के एक कोल्ड ड्रिंक की बोटल की लागत सिर्फ १रु पड़ती है क्योकि उसमे सिर्फ जीरा वाटर होता है वो भी बासी और उसमे किट नाशक मिलाया जाता है ताकि कोल्ड ड्रिंक सड़े नहीं,वो एक रु. का बासी पानी हम १०रु में पीते है क्योकि सेलेब्रिटी विज्ञापन में पीने को कहते है. इस के लिए कुछ हद तक हम जिम्मेदार है क्योकि भारत में ग्राहक जागरूकता की कमी है इस से बचने का सिर्फ एक ही तरीका है के कंपनी और ग्राहक एक हो जाये तथा बीच के बिचोलियों को हटा दिया जाये और वो तरीका है कोई अच्छी मल्टी लेवल मार्केटिंग कंपनी से जुड़ने का .मल्टी लेवल मार्केटिंग का इतिहास :लगभग ५० वर्ष पहले कनाडा में सुरु हुआ और सभी यूरोपीयन देशो में काफी सफल है तथा वह बड़ी बड़ी दिग्गज कंपनियों के प्रोडक्ट जैसे फोर्ड,कोकाकोला,बेल कोम्पुटर इत्यादि मल्टी लेवल मार्केटिंग के जरिए बेचे जाते है तथा वहा के स्कूलों में मल्टी लेवल मार्केटिंग कम्पलसरी सब्जेक्ट होता है. इंडिया में एम.एल.एम. लगभा १० वर्ष पुराना है.इंडिया में एम.एल.एम. को शक कीनजरो से देखा जाता है क्योकि इन दस वर्षो में बहुत सी एम.एल.एम. कंपनीया कुकुरमुत्ते की तरह उगी और चली गयी कारण सिर्फ एक कंपनियों का ढगी रवैया तथा भारत के उपभोगता संस्कृति के प्रतिकूल वातावरण.बहुत मंहगे और अनावश्यक प्रोडक्ट एक आम भारतीय उपभोगता के किस काम के,उसे तो वो प्रोडक्ट चाहिए जो उसे देनिक काम में आते हो.तो फिर कोनसी एम.एल.एम. का चुनाव करे जो भारत के उपभोगता संस्कृति के अनुकूल हो तो आओ देखे अच्छी मल्टी लेवल मार्केटिंग(एम.एल.एम.) किसे कहते है?१.कंपनी का इतिहास:कंपनी का इतिहास पुराना होना चाहिए,उसके मालिको का इतिहास कैसा है उसकी मार्केट में क्या इज्जत है,कही कंपनी फर्जी तो नहीं है उसका हेड ऑफिस और उसकी ब्रांच कह्या कह्या है.२.कंपनी के प्रोडक्ट:कंपनी के क्या क्या प्रोडक्ट है,क्या उन्हें खुद बनाती है,क्या कंपनी के प्रोडक्ट एक आम भारतीय उपभोगता के काम के है,क्या कंपनी के प्रोडक्ट बाज़ार से बहुत मंहगे है? एक आम उपभोगता को चाहिए 10 से १५रु वाला साबुन,अगर उसे कहा जाये की ५०रु वाला साबुन उत्तम है और कम गलता है तो तो एक आम उपभोगता 10 से १५रु वाला साबुन ही खरीदेगा ५०रु वाला नहीं क्योकि यही उसकी संस्कृति है और यही उसकी जेब की हैसियत.कंपनी ऐसा प्रोडक्ट बनाये जो एक आम भारतीय उपभोगता के काम के हो और उसकी उसकी जेब की हैसियत के,हमारे घर में साइकिल तक नहीं और कंपनी कार लिक्विड क्लीनर बेचे इसमें तो कोई तुक नहीं.३.कंपनी के प्रोडक्ट की क्वालिटी: कंपनी के प्रोडक्ट की क्वालिटी उत्तम होनी चाहिए,कही ऐसा तो नहीं कंपनी खुद का या किसी दूसरी कंपनी का घटिया प्रोडक्ट थमा रही हो.४.कंपनी का खुद का प्रोडक्ट केटालोग :कंपनी का खुद का मेनुफकचरिंग केटालोग होना चाहिए तथा कंपनी खुद प्रोडक्ट बनानी चाहिए,अगर किसी कंपनी के प्रोडक्ट की मार्केटिंग कर रही है तो कंपनी उस प्रोडक्ट की क्वालिटी कण्ट्रोल को चेक करे ताकी ग्राहक को घटिया प्रोडक्ट नहीं मिले.५.कंपनी के साथ जुड़े हुए डिस्ट्रीबुटर की संख्या :एक अच्छी कंपनी के साथ बहुत सारे डिस्ट्रीबुटर धीरे धीरे और स्थाई रूप से जुडेंगे,यदि किसी कंपनी के साथ बहुत सारे डिस्ट्रीबुटर अचानक एक साथ जुड़ जाये या अचानक एक साथ छोड़ कर चले जाये तो कंपनी की विस्वसनीयता पर शक हो जाता है.क्योकि एक अच्छी कंपनी कभी भी लुभावने वादे लेकर नहीं आती,वह तो लेकर आती है काम और विश्वास.अगर डिस्ट्रीबुटर विश्वास के साथ काम करे तभी इन्कम आये तह बिना मेहनत कभी इन्कम न आये क्योकि सफलता हमेशा दर्द की कोख से जनम लेती है .६.कंपनी का पॉलिटिकल बकग्राउंड: कंपनी ऐसी हो की वहा की राज्य सरकार जिसके खिलाफ न हो,या वहा की किसी सरकार द्वारा उसपर किसी प्रकार का प्रतिबन्ध या बेन (BAN ) नहीं लगाया गया हो.७.कंपनी के प्रोडक्ट की मांग : कही कंपनी ऐसा प्रोडक्ट तो नहीं बनाती जिसकी मार्केट में कोई डिमांड न हो,या उस देश की संस्कृति के अनुकूल न हो.यदि भारत में कोई कंपनी ऐसा प्रोडक्ट लाती है जैसे महँगी ताकत की दवाये,ब्लड प्रेशर ब्रासलेट,डायबिटीज़ की दवा,मंहगे क्लब की मेम्बरशिप,विदेश यात्रा पैकेज,वजन कम या बढ़ने की दवा इत्यादि तो आप मुझे बताये की भारत में कितने लोग इस तरह की कंपनी के प्रोडक्ट लेंगे.यहाँ तो ऐसी कंपनी चलेगी जो रोजमर्रा की चीजे जैसेकपडा,चाय,तेल,साबुन,शेम्पू,कॉस्मेटिक,लिक्विड क्लीनर,खाने कासामानजैसेबिस्कुट,नमकीन,मीठाई,गरम मसाला,चमड़े का सामान (जूते,बेल्ट,बैग,पर्स) रेडीमेड गारमेंट जैसे ( जींस,पेंट,शर्ट,टाई,टॉप,शूट,बनियान,अंडरगारमेंट),गर्म कपडे,इलेक्ट्रॉनिकआय़टम (घडी,कोम्पुटर ,लैपटॉप प्रिंटर) तथा जो कंपनी सर्विससेक्टरनभूले जैसेइंश्योरेंस,मोबाइल,बैंकिंग,ऑटोमोबाइल ,होसपीटल होटल्स,हाऊसिंग,होम अप्लाईनसेस,टीवी चेनल्स इत्यादि.अगर कोई कंपनी उपरोक्त सभी प्रोडक्ट या उनमे से बहुत सारे प्रोडक्ट की (M.L.M.) करती है तो निश्चित रूप से आनेवाले दिनों में सफल होगी .R.C.M. ही क्यों की जाये:अ़ब सवाल ये उठता है की कोनसी M.L.M.की जाये तथा R.C.M. ही क्यों की जाय,जवाब बिलकुल सीधा है उपरोक्त सभी सवालो का जवाब सिर्फ यही कंपनी दे सकती है,कंपनी १९७७ से कपडो के व्यवसाय में लीन है तथा सन २००० से मल्टी लेवल मार्केटिंग कर रही है तथा भारत की टॉप टेन(TEN) कपडा बनाने वाली कंपनी में से एक,तथा नमक से लेकर लैपटॉप तक सभी सामान एक ही दुकान में उपलब्ध,८० लाख से १ करोड़ के लगभग डिस्ट्रीबुटर,५००० RCM पीकअप सेंटर ,८०० RCM बाज़ार, भारत के २९ राज्यों ,९००० शहरो में बिज़नस,आनेवाले समय में RCM मेगा मार्ट खोलने की तैयारी,लगभग ७००० करोड़ की कंपनी,T.D.S.देने के मामले में RELIANCE के बाद नंबर दो पर,भारत की पहली कंपनी जिसने कभी किसी से LOAN नहीं लिया तथा भारत की पहली कर्ज रहित कंपनी.आज के युग में जहा बडी बडी नामी कंपनी BANK लोन लेकर व्यवसाय करती है वहा RCM बिना बैंक लोन लिए इतना विशाल व्यवसाय खडा करने में सफल हुई है .अगर आपकी मंजिल M.L.M. है तो आप के सवालो का जवाब है R.C.M.(RIGHT CONCEPT MARKETING) क्योकि यही मार्केटिंग करने का सही तरीका है

RCM BUSINESS SOME FACTS

RCM( RIGHT CONCEPT MARKETING) FASHION SUITINGS PVT।LTD।,BHILWARA(RAJASTHAN) FOUNDER: SHRI TILOK CHAND छाबरा 1977-ESTABLISHED FASHION SUITINGS PVT LTD AND STARTED TEXTILE BUSINESS। 1986-ESTABLISHED OWN TEXTILE MANUFACTURING UNIT। 2000-ACHIEVED PRODUCTION OF 1 CRORE METRE CLOTH PER ANNUM। 2000 AUG:CLOSED OLD SLM(SINGLE LEVEL MARKETING ) SYSTEM AND STARTED MULTI LEVEL MARKETING (MLM)। 2002:COMPANY BROGHT FMGC PRODUCTS IN THE MARKET UNDER RCM LOGO।TODAY SALT TO LAPTOP EVERT THING IS AVAILABLE IN RCM SHOP/BAZAR UNDER ONE ROOF। RCM: WORLD 1ST TEXTILE COMPANY ENGAGED IN MLM। RCM: AMONG TOP 10 TEXTILE MANUFACTURING CO।IN INDIA। RCM: PRESENT CAPACITY 3 CRORE METRE CLOTHS PER ANNUM।AND IN COMMING YEARS REACHING TOWARDS TOP OF THE TEN।र्क्म१DISTRIBUTORS,4000 RCM SHOPS,800 BAZARS,MORE THAN 600 PRODUCTS,STRONG BUSINESS NETWORK IN MORE THAN 9000 CITIES AND 29 STATES IN INDIA।RCM:MORE THAN ५ 000 CRORE COMPANY।RCM:ENGAGED IN SERVICE SECTORS SUCH AS ,TELECOMMUNICATIONSINSURANCE AND IN COMMING DAYS WILL ENTER IN PETROLEUM,EDUCATION,ELECTRONICS,HOTELS AND HOSPITALS,AUTOMOBILES,BANKING,HOUSING,TV।CHANNELS,HOME APPLIANCES,AIRLINES ETC।

MULTI LEVEL MARKETING(M.L.M.)MULTI LEVEL MARKETING(M.L.M.) का इंडिया में स्कोप: का इंडिया में स्कोप:

MULTI LEVEL MARKETING(M.L.M.) का इंडिया में स्कोप:मल्टी लेवल मार्केटिंग की शुरूवात सन १९५९ में कनाडा में हुई थी तथा तब से विदेशो में यह सिस्टम काफी लोकप्रिय हुआ है प्रतिशत के हिसाब से यह कितना विकसित है आओ देखे :देश M.L.M.का प्रतिशत अमेरिका 60%चीन 21% भारत 01% * सबसे कम भारत में यूरोप व अन्य देश 18% कुल 100% मल्टी लेवल मार्केटिंग का विकास सबसे अधिक अमेरिका में हुआ है वहां पर बड़ी बड़ी FAMOUS कंपनिया अपना प्रोडक्ट M.L.M. के जरिए बेचती है जैसे फोर्ड,कोकाकोला ,बेल कोम्पुटर इत्यादि वहां पर इसके स्कूल व कोलेज में कोर्सेस होते है भारत में यह ORGANISED INDUSTRIES का दर्जा हासिल नहीं कर पाई है तथा अभी भी लोग इसे शक की निगाह से देखते है उसका कारण है की बहुत सी fraud कंपनिया आयी और देश की जनता को ठग कर चली गयी इसलिए एक आम आदमी का अनुभव M.L.M. कंपनियों के प्रति खट्टा है,उसका कारण है देश में शिक्षा,प्रशिक्षण,जनजागरण का आभावअभी भी 100 में से सिर्फ 1 आदमी M.L.M. में सफल हो पाते वो भी सही ट्रेनिंग के बादइसका कारण है है M.L.M. में ज्वाइन करने के तरीके,आओ देखे:ज्वाइन करने का तरीका ज्वाइन करने का प्रतिशत BY OBLIGATION(दोस्त,रिश्तेदारों द्वारा): 30%BY FORCE (बॉस,अफसर,सरकारी अधिकारी द्वारा) : 25%BY MISGUIDENCE(गलत कांसेप्ट बताकर ) : 20%TO GIVE A TRY(या पीछा छुडाने ने के लिए) : 15%TO MAKE A SERIOUS CARREER : 10% *** (ये व्यक्ति सफल होंगे )TOTAL 100%जो व्यक्ति इसे सीरियस हो कर बिजनस करियर के रूप में ज्वाइन करेगा वही SUCCESS होगा M.L.M. में कामयाब होने के लिए क्या क्या योग्यता होनी चाहिए?१.आपके अंदर काम करने की BURNING DESIRE(मजबूत इरादे )होने चाहिए क्योकि मजबूत इरादों से ही ज़ंग जीती जाती है दुनिया की ऊँची से ऊँची चोटी इन्सान के इरादों से ऊँची नहीं है२.यह बिजनेस लोगो को तलाशने का नहीं तराशने का बिजनेस है. किसी को ये सोच कर JOIN न कराये की ये मुझे कामयाब बनाएगा बल्कि ये ये सोच कर JOIN कराये की मुझे इसको कामयाब बनाना है,क्योकि वो कामयाब होगा तो आप भी कामयाब होगे ३.स्वार्थ की भावना नहीं होनी चाहिए,लेने वाला नहीं देने वाला होना चाहिए तभी आदमी लीडर बनेगा ( HELPING OTHERS TO LIGHT THEIR FUTURE)4.सिस्टम के द्वारा बताये गए टूल्स जैसे टेप,सीडी,विडियो,बुक्स का प्रयोग रोज करे,सेमिनार,फंक्शन्स अटेंड करे५.बिज़नस के लिये थोडा सा वक़्त निकाले,अभी थोडा सा COMPROMISE करे बाद में जिंदगी में कोई COMPROMISE करना न पड़े थोडी थोडी कुर्बानी करके धीरुभाई अम्बानी ने ६५ हजार करोड़ रु का साम्राज्य (EMPIRE) खडा कर दिया६.सुरुवात आसान हो तो अंत ख़राब होता है,नरक के रास्ते आसान होते है पर स्वर्ग के रास्ते कठिन होते हैइस बिजनस को सुरु करने में सुरुवात में थोडी कठिनाई होती है पर बाद में सुख की अनुभति होती है७.'MAGIC WORDS'-SORRY,THANK YOU :जादुई शब्द सॉरी,थैंक्यू का प्रयोग करने में देरी न करे अगर समय रहते रावण ने सॉरी कहा होता तो रामायण नहीं होती और समय रहते दुर्योधन ने सॉरी कहा होता तो महाभारत नहीं होतीक्योकि तारीफ करेंगे तो क्वालिटी में बढोतरी होगी और निंदा करेंगे तो EGO(अहम् ) का जनम होगा और अहम् इस बिजनेस का शत्रु है८.जब जब कोई नया काम होता है तो जमाना उसपर हँसता है,आप लोगो के हँसने पर न जाये क्योकि जब जब जमाना हँसा है इतिहास रचा है९.SELF MOTIVATION:जब तक आप खुद को MOTIVATE नहीं करोगे तब दूसरो को MOTIVATE नहीं कर पाओगेएक दुबले पतले आदमी ने पुरे भारत को ऐसा MOTIVATE किया की अंग्रेजो को हिंदुस्तान से खदेड़ दिया जिसे आज हम महात्मा गाँधी के नाम से जानते हैअगर आप साहस करके LEAD करोगे तो लोग आपको अपने आप FOLLOW करेंगेएक अच्छा बीमा एजेंट एक अच्छा MOTIVATOR होता है10.समाज में एक अछी छवि(GOODWILL,IMAGE) बनाये,आपकी सच्चाई,ईमानदारी,निस्वार्थ स्वाभाव देखकर कोई आपके व्यक्तित्व से प्रभावित होकर ऐसे ही ज्वाइन कर लेगा११.लोगो को भरपूर प्यार व सम्मान देना है और विश्वास जगाना है और अच्छा रिलेशन BUILT करना हैक्योकि एक रिलेशन कई रिलेशन का बीज होता हैअपनी अच्छाई से लोगो की बुराई को ख़त्म कर सकते है यही LEADERSHIP की ताकत है११.हमेशा हँसमुख रहे क्योकि हँसमुख व्यक्ति लीडर बनता है और दुखी व्यक्ति कभी भी लीडर नहीं बन सकताहैकेवल काम करते रहे आपको सही व्यक्ति जरूर मिलेगा "YES THEY ARE RARE BUT THEY ARE"12.बड़ा सोचे(छोटी छोटी आंखे बड़े बड़े सपने):बड़ा सोचेंगे तो बड़ा बनेंगे और छोटा सोचेंगे तो छोटे होंगे,गरीब हमेशा गरीबी के बारे में सोचता है इसलिए गरीब होता है और अमीर हमेशा अमीरी के बारे में सोचता है इसलिएअमीर होता है. शेष शीघ्र ............................